21/12/2012

ये महलों, ये तख्तो, ताजों की दुनिया..इंसान के दुश्मन
 समाजों की दुनिया..दौलत के भूखे रवाजों की दुनिया..
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है..

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