07/03/2013

ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर 

बारिशें हों, तो भीग जाया कर 

धूप मायूस लौट जाती है 

छत पे कपड़े सुखाने आया कर.......!

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रंग बातें करें और बातों से ख़ुश्बू आए दर्द फूलों की तरह महके अगर तू आए