27/05/2013

लिख लिख क मिटा दी हैं सब नज्में आज हमने..

जैसे बचपन में, सारे खिलोने तोड़ दिए थे गुस्से में!!

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रंग बातें करें और बातों से ख़ुश्बू आए दर्द फूलों की तरह महके अगर तू आए