29/06/2013

"फ़कीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या है..
तुझे पता नही तेरा ग़ुलाम क्या क्या है"....

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रंग बातें करें और बातों से ख़ुश्बू आए दर्द फूलों की तरह महके अगर तू आए