01/10/2013

"दास्ताँ अधूरी हमारी मोहब्बत में रह गयी ,
वो जालिम ज़माने को अपनाने में रह गयी,

आज वही शक्स मेरी न सुनता है न कहता है ,
मै ताउम्र जिनकी बातो में रह गयी ,

जिन्दगी आसान ही थी तुमने इश्क से उलझा दिया,
अपनी मोहब्बत सवालो-जवाबो में रह गयी ,

कहता रहा मै उसको मुझपे ऐतबार कर ,
और वो मशरूफ इल्जामो में रह गयी,

तालीम छोड़िये हमने लोगो को पढ़ के जाना है,
दुनिया में अच्छाई किताबो में रह गयी "..

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रंग बातें करें और बातों से ख़ुश्बू आए दर्द फूलों की तरह महके अगर तू आए