01/10/2013

"बुलंदिओं का जरा सा सुरूर आते ही,
गिरा जमीन पे परिंदा गुरूर आते ही"..

No comments:

Post a Comment

रंग बातें करें और बातों से ख़ुश्बू आए दर्द फूलों की तरह महके अगर तू आए