01/10/2013

कुछ लम्हो का हिसाब रखने की जुर्रत की...
तभी से बेहिसाब हो गए..!

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रंग बातें करें और बातों से ख़ुश्बू आए दर्द फूलों की तरह महके अगर तू आए