29/10/2013

उस काँच के गिलास में पड़ी, गरम चाय के दो घूंटो में ही थी,
और तुम ज़िन्दगी को कहाँ कहाँ ढूंढते रहे...!!!”

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रंग बातें करें और बातों से ख़ुश्बू आए दर्द फूलों की तरह महके अगर तू आए